शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2011

शब्द मेरे ........


क्या रह गया है अब मेरे पास ,
                         मात्र शब्द मेरे

कभी टूट जाते है ,
कभी बिखर जाते है ,
             कभी गुनगुनाते है , शब्द मेरे

क्या होगा मेरा
अगर किसी ने छीन लिए ,
कभी कभी कुछ भी नही
                  कह पाते है , शब्द मेरे

मुझे रुलाते है ,
मुझे हँसाते है ,
             मुझे समझाते है ,   शब्द मेरे

मन मेरा तेरा आभारी है ,
                            शब्द मेरे..... .

6 टिप्पणियाँ:

Sunil Kumar ने कहा…

शब्द एक दौलत से कम नही साथक रचना , बधाई

vijaymaudgill ने कहा…

main to kehta hu shabd hi brahmand hain. bahut sundar rachna. abhaar

: केवल राम : ने कहा…

सच में यह शब्द ..पर सारा जहाँ इन शब्दों का मोहताज है.. बहुत सुंदर .

शिखा कौशिक ने कहा…

सुन्दर-सार्थक प्रस्तुति .बधाई .

मदन शर्मा ने कहा…

पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ |
सभी कविताएं रोचक एवं बेजोड़|
मेरी हार्दिक शुभ कामनाएं आपके साथ हैं !!
http://madanaryancom.blogspot.com/

Richa P Madhwani ने कहा…

http://shayaridays.blogspot.com