रविवार, 26 फ़रवरी 2017

Five Point Review - "SAIRAT"


 Sairat - official trailer

I watched this movie today on Zee Yuva channel.This is first time I watched the movie, though it had been released in cinemas 8 months back.
My review goes as following. I liked the movie finding overall good in the departments of direction, music, script etc.

1. Movie is about teen age boy and girl love story.( may be school going or college going????)
2. It may set a bad example for our teen agers , to run away from homes since parents are not accepting their love.
3. It also shows too much stubbornness of parents  , which in my openion , should not be here in modern days.

4. Music/songs are good and melodious.
5.Scenes relating to make a living , the couple doing jobs/ looking to buy a home / having a child / etc etc seems to dramatic.

Over all good entertaining movie. Can be given *** and 1/2 star rating.

सोमवार, 23 फ़रवरी 2015

Hi
This is me once again.
After a loooooooooooooooooooong time no see, I am coming back.

शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2011

शब्द मेरे ........


क्या रह गया है अब मेरे पास ,
                         मात्र शब्द मेरे

कभी टूट जाते है ,
कभी बिखर जाते है ,
             कभी गुनगुनाते है , शब्द मेरे

क्या होगा मेरा
अगर किसी ने छीन लिए ,
कभी कभी कुछ भी नही
                  कह पाते है , शब्द मेरे

मुझे रुलाते है ,
मुझे हँसाते है ,
             मुझे समझाते है ,   शब्द मेरे

मन मेरा तेरा आभारी है ,
                            शब्द मेरे..... .

बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

ये मुझे क्या हो रहा है ?


एनकाउंटर  कक्ष “
महाकंकाल  एनटरप्राइजेज़ “
शादी  की सबसे बड़ी क्रान्ति “
“ यहाँ विज्ञापन ना चिपकाए - आदर्शानुसार

यूं तो मुझे घर और ऑफिस के चक्कर मे हमेशा ही हड़बड़ी होती रहती है | पर ये क्या हो रहा है ..... जो पिछले दिनो मैंने ऑफिस या बाज़ार आते जाते , दीवारों पर /दुकानों के साइन बोर्ड / या किसी सूचना पट पर लिखे हिन्दी वाक्यो को कुछ इस तरह से पढ़ लिया | जबकि वहाँ लिखा था –
“अनाउंसमेंट कक्ष”
“महांकाल एनटरप्राइजेज़”
“सदी की सबसे बड़ी क्रान्ति”
“यहाँ विज्ञापन ना चिपकाए – आदेशानुसार”

क्या सबके साथ ऐसा होता रहता है ????

गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

जब मैं छोटा था...

कल मेरे कज़ीन ने एक ई–मेल फारवर्ड की |इस मेल ने कुछ सोचने पर विवश कर दिया| दिल को छू लेने वाली इस रचना को अपने ब्लॉग पर शेयर कर रही हूँ –

“ “ “....
जब मैं छोटा था, शायद दुनिया बहुत बड़ी हुआ करती थी...
मुझे याद है मेरे घर से "स्कूल" तक का वोह रास्ता, क्या क्या नहीं था वहां, चाट के ठेले, जलेबी की दूकान, बर्फ केगोले, सब कुछ,
अब वहां "मोबाइल शॉप", "विडियो पार्लर" है, फिर भी सब सूना है...
शायद अब दुनिया सिमट रही है...


जब मैं छोटा था, शायद शामे बहुत लम्बी हुआ करती थी...
मैं हाथ में पतंग की डोर पकडे, घंटो उड़ा करता था , वो लम्बी "साइकिल रेस", वो बचपन के खेल, वो हर शाम थकके चूर हो जाना,
अब शाम नहीं होती, दिन ढलता है और सीधे रात हो जाती है...
शायद वक्त सिमट रहा है...

जब मैं छोटा था, शायद दोस्ती बहुत गहरी हुआ करती थी...
दिन भर वो हुज़ोम बनाकर खेलना, वो दोस्तों के घर का खाना, लड़कियों की बातें, वो साथ रोना, अब भी मेरे कईदोस्त है,
पर दोस्ती जाने कहाँ है, जब भी "ट्रेफिक सिग्नल" पे मिलते है "हाई" करते है, और अपने अपने रस्ते चल देते है,
होली, दिवाली, जन्मदिन, नए साल पर बस SMS आ जाते है...
शायद अब रिश्ते बदल रहे है...


जब मैं छोटा था, तब खेल भी अजीब हुआ करते थे,
छुपन छुपाई, लंगड़ी टांग, पोषम पा, कट थे केक, टिपि टिपि टाप,
अब इन्टरनेट, ऑफिस, फिल्म्स से फुरसत हई नहीं मिलती...
शायद ज़िन्दगी बदल रही है...


ज़िन्दगी का सबसे बड़ा सच यही है... जो अक्सर कबरिस्तान के बहार बोर्ड पर लिखा होता है,
"मंजिल तो यही थी, बस ज़िन्दगी गुज़र गयी मेरे यहाँ आते आते"...

ज़िन्दगी का लम्हा बहुत छोटा सा है,
कल की कोई बुनियाद नहीं है...
और आने वाला कल सिर्फ सपने में ही है...
अब बच गए इस पल में...
तमन्नाओं से भरी इस ज़िन्दगी में हम सिर्फ भाग रहे है...
इस ज़िन्दगी को जीयो ना कि काटो... “ “ “


नया साल आने को है | उम्मीद है कि नया साल सभी के लिए आशाओ से भरा और उमंगों से जगमग होगा |

सोमवार, 27 दिसंबर 2010

Salute to 2010

The Year has almost Gone...
But made us strong.

The path was long...
But we walked with a song.

There were fears & tears & cheers...
As we traveled the year.

We know that GOD doesn't require us to " Be the BEST"
He just want us to " DO Our BEST"
and ,he will take care of the rest!!!

With Happy memories of the year ,
Good Bye dear year 2010.

गुरुवार, 23 दिसंबर 2010

हैप्पी बर्थडे माइ डियर ब्लॉग

डियर ब्लॉग – बिलेटेड हैप्पी बर्थ दे टू यू !!!!
ब्लॉग का पहला बर्थ डे 9 दिसंबर को निकल गया और मुझे अब ध्यान आया |

डियर ब्लॉग , देर से ही सही , ... जनम दिन मुबारक ।


इस अवसर पर ब्लॉग को नया कलेवर देना ही है |
तीन चार दिनों तक ढेरो टेम्पलेट्स खोजने की कवायद करते हुए एक डिजाइन पसंद आया और इसके ले आउट मे छोटे मोटे बदलाव करने के बाद , लो जी... मेरा ब्लॉग नए रूप मे प्रस्तुत है |
खिले चटख रंग, फूल , तितलिया , मेरे मन को भा गए है |
डियर ब्लॉग जी .... तुम जियो हजारो साल , साल के दिन हो पचास हजार |